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साईट का मुख्य मेनू

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23 September, 2015

23 सितंबरके महत्त्वपूर्ण न्यूज 23.09.15

1.सिल्क रोड परियोजना पर भारत की आशंकाओं को चीन ने किया खारिज:- चीन ने अपनी महत्वाकांक्षी सिल्क रोड परियोजना को लेकर भारत की आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की शक्तिशाली स्थायी समिति के पांचवे नंबर के सदस्य ल्यू युनशान ने नई दिल्ली को आश्वस्त किया है कि इस परियोजना से जुड़ने वाले देश व्यावसायिक रूप से लाभ में रहेंगे। युनशान अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के संपादकों से मुखातिब थे। सीपीसी के मुखपत्र पीपुल्स डेली ने ओबीओआर पर इस मीडिया सम्मेलन का आयोजन किया था। वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता ने कहा, ‘कुछ मीडिया का आरोप है कि यह परियोजना चीन की विस्तारवादी नीति की परिचायक है और वैश्विक व्यवस्था को खतरे में डालने वाली है। जबकि ओबीओआर का मुख्य मकसद उन सभी देशों को लाभ प्रदान करना है जो इसमें चीन के साथ शामिल होंगे।’ युनशान ने यह टिप्पणी ओबीओआर को लेकर भारत की चिंताओं के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए की। उनका कहना था कि मौजूदा विश्व में कोई भी देश अकेले तरक्की नहीं कर सकता है। ओबीओआर परियोजना कई देशों से जुड़ी है। यही कारण है कि हम खुलेपन और विकास पर जोर दे रहे हैं। प्राचीन समय में भी चीन इसी सिल्क रोड के जरिये कई सभ्यता, संस्कृति और धर्मो के संपर्क में आया। दरअसल भारत ने सिल्क रोड के वन बेल्ट वन रोड परियोजना के तहत प्रस्तावित चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरीडोर का विरोध किया है क्योंकि इसका गुलाम कश्मीर से गुजरना तय है। लेकिन वह बांग्लादेश, चाइना, इंडिया, म्यांमार आर्थिक कॉरीडोर में शामिल है। वैसे भारत ने आधिकारिक तौर पर ओबीओआर का कभी खुले तौर पर आधिकारिक विरोध नहीं किया है। हिन्द महासागर क्षेत्र में मारीटाइम (समुद्री) सिल्क रोड लागू करने की चीन की योजना पर भी भारत चुप है। भारतीय विशेषा भी परियोजना को लेकर बंटे हुए हैं। एक तबका मानता है कि इसमें शामिल होने के अपने लाभ हैं जबकि दूसरे वर्ग का कहना है कि इससे भारत के सामरिक और व्यावसायिक हित प्रभावित होंगे। इस परियोजना के लिए चीन ने 40 अरब डॉलर का सिल्क रोड फंड बना रखा है। इतना ही नहीं उसने 50 अरब डॉलर की पूंजी से एशिया इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट बैंक की स्थापना भी की है। भारत और 56 अन्य देश बीजिंग स्थित इस बैंक के सदस्य हैं।
2. मोदी आज से आयरलैंड और अमेरिका यात्रा पर:- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बुधवार 23 सितम्बर को दो देशों आयरलैंड और अमेरिका की यात्रा के लिए रवाना हो रहे हैं। अपनी यात्रा के पहले पड़ाव में वह आयरलैंड के डबलिन जाएंगे। वहां वह उस देश के सरकार प्रमुख ऐंडा केनी के साथ र्चचा करेंगे। वह आयरलैंड में भारतीय समुदाय के साथ भी संक्षिप्त वार्ता करेंगे।मोदी ने अपनी यात्रा से पहले ट्वीट किया, हमें उम्मीद है कि आयरलैंड के साथ जनता-से-जनता के बीच संबंध और प्रगाढ़ होंगे और आने वाले दिनों में आर्थिक रिश्ते भी विस्तार लेंगे। अमेरिका में वह न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र सतत विकास शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा वह अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा आयोजित शांति के लिए शिखर बैठक में भी शिरकत करेंगे।प्रधानमंत्री अमेरिका प्रवास के दौरान विश्व के कई नेताओं से मिलने के अलावा निवेशकों और वित्तीय कंपनियों के प्रमुख लोगों से भी भेंट करेंगे। वह 27 सितम्बर को सैन जोस जाएंगे जहां वह भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। मोदी ने कहा, मुझे पूरा विास है कि अमेरिका की मेरी यात्रा फलदायी होगी और विश्व के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच रिश्ते और गहरे होंगे। प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र की 70 वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक समारोह में शरीक होंगे।
3. संयुक्त राष्ट्र की हमारी सदस्यता के लिए भी भूमिका तैयार करेगा भारत-अफ्रीका समिट :- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों की संख्या में विस्तार को लेकर भारत के प्रयासों की जीत के बाद केंद्र सरकार ने इसको लेकर अगली रणनीति पर भी काम शुरू कर दिया है। अगले माह होने वाली भारत-अफ्रीका समिट में वह इसमें शामिल होने वाले सभी अफ्रीकी देशों को इस विषय पर अपने साथ रखने के उपायों पर काम कर रही है। प्रयास यह किया जा रहा है कोई भी ऐसा सवाल हो, जिस पर सरकार तार्किक जवाब दे पाए। इसके लिए एक कोर टीम भी विदेश मंत्रालय में बनाई गई है। इसका उद्देश्य यही है कि जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को लेकर संयुक्त राष्ट्र में चर्चा हो तो सभी अफ्रीकी देश भारत के साथ रहें। यह समिट 26-30 अक्टूबर को आयोजित होगा। दरअसल, यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता का ही विषय था कि सरकार ने एक साथ सभी 54 अफ्रीकी देशों को निमंत्रित करने का निश्चय किया, ताकि वह एक साथ इन सभी देशों के साथ वार्ता कर पाए। इससे पहले 1983 में हुए सम्मेलन में अधिकतम 33 अफ्रीकी नेताओं ने शिरकत की थी, जबकि इसके अलावा अन्य समिट में कभी भी 15 से अधिक नेता शामिल नहीं हुए।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान भारत जिन अन्य मसलों पर ध्यान केंद्रित करेगा, उनमें भारत-अफ्रीकी देशों के बीच कारोबार-व्यापार-पर्यटन को बढ़ावा देना भी शामिल है। इसके अलावा भारत का प्रयास रहेगा कि वह सिर्फ इन देशों को आर्थिक सहायता देने की जगह उनके यहां पर क्षमता उन्नयन का कार्य करे, जिससे वे विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भर हो पाएं। यही नहीं, समिट के दौरान चीन के उन प्रयासों से निपटने को लेकर भी भावी रणनीति तय की जाएगी, जिसके तहत बीजिंग प्रयास कर रहा है कि वह अफ्रीकी देशों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग-समझौता बढ़ाने के साथ विभिन्न अफ्रीकी देशों के साथ होने वाली बैठक को समिट का रूप दे। एक अधिकारी ने कहा कि यह समिट संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिहाज से अहम है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसी होटल या विज्ञान भवन में इसे आयोजित करने की जगह इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित होगा। इसकी वजह बताते हुए विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि असल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते थे कि सभी अफ्रीकन नेताओं के साथ ऐसी बैठक हो कि सभी के साथ सीधे आई-कांटेक्ट हो ऐसे में गोलमेज सम्मेलन की तरह इसे आयोजित करना था। यही वजह है कि इसे इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित करने की तैयारी है। इससे सभी को एक समान सम्मान की अवधारणा अमल में आएगी।
4. अमेरिका के साथ चॉपर डील मंजूर:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (सीसीएस) ने अमेरिकी विमानन कंपनी बोइंग से 22 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों और 15 शिनूक हैवी लिफ्ट हेलीकॉप्टरों के लिए 2.5 अरब डॉलर के सौदे को सोमवार को मंजूरी दे दी। सरकारी सूत्रों ने बताया, ‘‘अपाचे और शिनूक (हेलीकॉप्टरों) के सौदे को मंजूरी दे दी गई।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सीसीएस की बैठक कैबिनेट की बैठक के बाद हुई। सीसीएस में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने भाग लिया। रक्षा क्षेत्र से जुड़े अनेक लोगों को उम्मीद थी कि 2013 में लागत वार्ता को अंतिम रूप दिए जाने के बाद से लंबित और करीब ढाई अरब डालर मूल्य के इस सौदे पर इस साल जून में अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर की यात्रा के दौरान दस्तखत किए जाएंगे।अपाचे का यह सौदा ‘‘हाइब्रिड’ है जिसमें हेलीकॉप्टर के लिए एक करार पर बोइंग के साथ दस्तखत किए जाएंगे, जबकि उसके हथियारों, रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरणों के लिए अन्य पर अमेरिका सरकार के साथ दस्तखत किए जाएंगे। अमेरिका इस करार पर जोर दे रहा है, क्योंकि यह भारत के बढ़ते रक्षा बाजार में अमेरिकी मौजूदगी को और मजबूत करेगा। रक्षा सूत्रों ने कहा कि इस सौदे के तहत 30 प्रतिशत निवेश भारत में करने की (ऑफसेट) प्रतिबद्धता होगी। ऑफसेट नीति सबसे पहले रक्षा खरीद प्रक्रि या (डीपीपी), 2005 के तहत लाई गई थी, जिसके तहत किसी विदेशी कंपनी को सौदे के एक हिस्से के बराबर भारत में निवेश करना होता है। पिछले एक दशक के दौरान अमेरिकी कंपनियों ने भारत से तकरीबन 10 अरब डालर मूल्य के रक्षा करार हासिल किए हैं। इनमें पी-81 समुद्री टोही विमान, सी-130जे ‘‘सुपर हरक्यूलियस’ और सी-17 ग्लोबमास्टर-3 जैसे विमानों शामिल हैं।
5. केंद्र ने कहा, आरक्षण पर पुनर्विचार की जरूरत नहीं:- आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा किए जाने संबंधी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के सुझाव से नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा स्वयं को अलग किए जाने के बावजूद विपक्ष की ओर से हो रही तीखी आलोचनाओं में मंगलवार को बसपा ने भी सुर मिलाते हुए चेतावनी दी कि अगर इस व्यवस्था को बदलने की कोशिश की गई तो केन्द्र को राष्ट्रव्यापी आंदोलन का सामना करना पड़ेगा। भाजपा ने सोमवार को अपने को भागवत के बयान से अलग कर लिया था । कांग्रेस ने भागवत के सुझाव की आलोचना करते हुए कहा कि भारत में आरक्षण का मुद्दा संविधान के तहत सुलझ चुका है। मंगलवार को इस मुद्दे पर कैबिनेट की बैठक के बाद संवाददाताओं के सवालों के जवाब में केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार और भाजपा दोनों का मत है कि वर्तमान आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता नहीं है। प्रसाद सोमवार को भी पार्टी की ओर से ऐसा बयान दे चुके हैं।उन्होंने कहा कि हमारी सरकार अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़े वगरे और अति पिछड़े वगरे की वर्तमान आरक्षण व्यवस्था में किसी तरह का परिवर्तन किए जाने के पक्ष में नहीं है। हमारा विास है कि आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक प्रगति के लिए यह आवश्यक है। इस पर पुनर्विचार किए जाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
6. पाक और चीन के ड्रोन से मुकाबला करेगा भारत का इजरायली हेरॉन:- भारत ने इजरायल से ड्रोन खरीदने की अपनी योजना को तेज कर दिया है। रक्षा सूत्रों ने इस आशय की जानकारी देते हुए बताया कि ड्रोन की मदद से सेना निजी स्तर पर कम से कम खतरा मोल लेते हुए विदेशी धरती पर हमलों को अंजाम दे सकेगी। भारत की ओर से ड्रोन खरीदने की यह खबर पाकिस्तान द्वारा अपनी जमीन पर ड्रोन का इस्तेमाल किए जाने के एक सप्ताह बाद आई है। पाकिस्तान ने अपनी ही जमीन पर आतंकवादियों के साथ मुकाबला करने करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया था। परमाणु शक्ति से लैस पड़ोसी देश की नई क्षमता ने भारत के सामने एक नई परेशानी पैदा कर दी है। बंटवारे के बाद से ही दोनों देशों के बीच कश्मीर मुद्दे पर गतिरोध जारी है। तीन साल पहले इजरायल से हेरॉन खरीदने का विचार किया गया था। सूत्रों के अनुसार, चूंकि पाकिस्तान और चीन ने अपनी ड्रोन युद्ध क्षमता विकसित कर ली है इसलिए जनवरी में सेना ने पत्र लिखकर सरकार से हेरॉन की आपूर्ति में शीघ्रता बरतने का आग्रह किया था। सितंबर में भारत सरकार ने वायुसेना के 10 हेरॉन खरीदने के आग्रह को मंजूर कर लिया। मामले की जानकारी रखने वाले वायुसेना के एक अधिकारी ने बताया कि इजरायल के एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज से हेरॉन खरीदा जाएगा। इसे जमीनी लक्ष्य भेदने में सक्षम हथियारों से लैस किया जा सकता है।
7. भारतवंशी ने खोजी ब्लैक होल की नई श्रेणी:- भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक के नेतृत्व में खगोलविदों के दल ने हमारे सूरज के द्रव्यमान के तकरीबन 5000 गुना यादा आकार के मध्यम द्रव्यमान वाले एक नए ब्लैक होल की खोज करने में सफलता हासिल की है। यह खोज यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड के धीरज पशाम और नासा के गोड्डार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के वैज्ञानिकों ने मिलकर की है। इस खोज से ब्लैक होल की एक तीसरी नई श्रेणी के वजूद का मामला मजबूत होता है। लगभग सभी ब्लैक होल दो में से किसी एक आकार के होते हैं। पहला, तारकीय द्रव्यमान वाले ब्लैक होल जो हमारे सूरज के द्रव्यमान के कुछ दर्जन गुना वजन के होते हैं या फिर अति द्रव्यमान (सुपरमैसिव) ब्लैक होल जो हमारे सूर्य के द्रव्यमान के लाखों से ले कर कई अरब गुना अधिक वजन के होते हैं। खगोलविदों का मानना है कि इन दो चरम आकार के अतिरिक्त एक मध्यम आकार के ब्लैक होल का भी वजूद है। लेकिन इसके वजूद के बारे में जानकारी करना बेहद मुश्किल हो रहा था। इसमें शामिल होने लायक मोटे तौर पर पांच-छह प्रतिभागियों का जिक्र आया है। इस खोज ने मध्यम आकार के ब्लैक होल की सूची के लिए एक और प्रतिभागी जोड़ दिया है और साथ ही इस अवधारणा को मजबूती प्रदान की है कि इस तरह के पिंडों का वजूद है।
8. एडीबी ने भारत की वृद्धि दर का अनुमान घटाया:- मानसून की कमजोरी, नियंतण्र बाजार में मांग की कमी तथा सुधारवादी आर्थिक उपायों को आगे बढ़ाने में सरकार की असमर्थता को देखते हुए एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने चालू वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर का अनुमान पहले के 7.8 प्रतिशत से घटा कर 7.4 प्रतिशत कर दिया है।इस बहुपक्षीय संगठन ने एशिया के विकास के परिदृश्य (एडीओ) पर अपनी ताजा टिप्पणी में भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति के चार प्रतिशत या उससे 0.2 प्रतिशत ऊपर-नीचे रहने का अनुमान बरकार रखा है। पर उसका कहना है कि कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीयबाजार तेज हुआ तो उसका मुद्रास्फीति की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। एडीबी की रपट में भारत की वृद्धि की संभावना के बारे में कहा गया है, ‘‘एडीओ-15 के पूर्वानुमानों को संशोधित कर 2015-16 में 0.4 प्रतिशत नीचे 7.4 प्रतिशत किया जाता है।
9. इंदिरा नूई:- दिग्गज कोला कंपनी पेप्सीको की प्रमुख इंदिरा नूई को यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआइबीसी) का 2015 का ग्लोबल लीडरशिप पुरस्कार दिया गया है। उन्हें यह पुरस्कार ज्यादा समावेशी ग्लोबल इकोनॉमी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता व महिला रहनुमा के तौर पर उनकी भूमिका के लिए दिया गया है। इसके अलावा एचटी ग्रुप की चेयरपर्सन शोभना भरतिया को भी यह पुरस्कार मिला है। दोनों को सोमवार को एक समारोह में सम्मानित किया गया।

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